होली के रंग, योगियों के संग

स्वामी चिदानंद सरस्वती जी, गायक कैलाश खेर एवं आर्केस्ट्रा एवं ढोलवादक शिवमणि झूमें होली के भजनों पर

रंगों की होली, संगीत और योग का हुआ संगम अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव के समापन अवसर पर

छह महाद्वीपों एवं विश्व के 101 देशों के प्रतिभागी हुए होली के रंगों में सराबोर

अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव के समापन अवसर पर पूज्य स्वामी चिदानंद सरस्वती जी महाराज, योगगुरु पूज्य बाबा रामदेव, पूज्य स्वामी अवधेशानंद गिरी जी महाराज, पूज्य प्रेम बाबा, पूज्य संत मुजी आयुष मंत्री भारत सर्कार श्रीपाद नाइक, आयुष सचिव भारत सरकार, श्री अजित सरन जी, प्रमुख सचिव उत्तराखंड सरकार श्री रामास्वामी, उत्तराखंड सरकार के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्रालय के सचिव श्री शैलेश बगोली एवं विवेकानंद योग अनुसन्धान संस्थान के वाइस चांसलर श्री एच आर नागेन्द्र ने किया सहभाग

न जाति से, न धर्म से केवल योग से हो पहचान – स्वामी चिदानंद सरस्वती

7 मार्च, ऋषिकेश । परमार्थ निकेतन, आयुष मंत्रालय – भारत सरकार, उत्तराखंड पर्यटन विकास बोर्ड, एवं गढ़वाल मंडल विकास निगम द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित 29 वें वार्षिक विश्व विख्यात अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव का आज अंतिम दिन है ।

इस विश्व विख्यात कार्यक्रम की मेजबानी परमार्थ निकेतन द्वारा सन 1999 से निरंतर की जा रही है । इस महोत्सव ने विश्व स्तर पर अपनी एक विशिष्ठ पहचान स्थापित की है तथा वर्ष प्रतिवर्ष पूरी दुनिया में इसका व्यापक प्रसार हो रहा है । इस अंतरराष्ट्रीय योग महाकुम्भ में सम्पूर्ण विश्व के लगभग 101 देशों से अनेक प्रतिभागियों ने सहभाग किया ।

योग की कक्षाएं प्रातः 4 बजे से रात 9:30 बजे तक लगभग 70 से अधिक पूज्य संतों, योगाचार्यों एवं विशेषज्ञों द्वारा संचालित हो रही है जो विश्व के 20 से अधिक देशों से पधारे हैं ।

अष्ठांग योग, अयंगर योग, विन्यास योग, कुंडलिनी योग, जीवनमुक्ति योग, संतोष योग, सोमैटिक योग, हठ योग, राज योग, भक्ति योग, भारत योग, गंगा योग, लीला योग, दिप योग आदि एक सपताह तक प्रस्तुत किये जाने वाले 150 योगों के मुख्या प्रारूप हैं । इसके अतिरिक्त ध्यान, मुद्रा, संस्कृतवाचं, आयुर्वेद, रेकी एवं भारतीय दर्शन की भी कक्षाएं सम्पन्न हो रही है । देश-विदेश से आये हुए आध्यात्मिक महापुरुषों एवं धर्मगुरुओं द्वारा धार्मिक संवाद एवं प्रश्नोत्तरी का भी विशेष आयोजन इस अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव में किया गया ।

आज अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव की प्रथम सुबह की शुरुआत प्रातः 4 बजे कैलिफोर्निया अमेरका से आये गुरूशब्द सिंह खालसा द्वारा कुंडलिनी योग के अभ्यास के साथ हुई । तत्पश्चात चीन के कृष्णमूर्ति मोहन राज ने विन्यास शक्ति, बैंगलोर के एच एस अरुण ने योग एवं प्राणायाम, ऋषिकेश के वर्त्तमान में चीन निवासी मोहन भण्डारी एवं चार्ट सिंह ने ‘जीवन प्रद्धति का प्रबंधन’ विषय पर कक्षाएं सम्पन्न की । हवाई dip अमेरिका से आयी अनंदर जॉर्ज द्वारा माँ गंगा के पावन तट पर भक्तिमय कीर्तन का आयोजन किया गया ।

अल्पाहार के पश्चात प्रातःकालीन योग आसान की कक्षाओं में दो घंटे तक योगगुरुओं द्वारा योग का अभ्यास कराया गया । अमेरिका से आये जूल्स फेबर द्वारा ‘जीवनमुक्ति योग’ साध्वी आभा सरस्वती जी द्वारा पारंपरिक हठ योग, डॉ राधिका नागरथ द्वारा योगिक जोगिंग, आनंद मेहरोत्रा द्वारा पावर योग, युवा डालन द्वारा युवा योग, डॉ इंदु शर्मा द्वारा पारंपरिक हठ योग तथा चीन के मोहन भण्डारी द्वारा योगी योग की कक्षाओं का संपादन किया गया ।

अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव के अंतिम दिन परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष पूज्य स्वामी चिदानंद सरस्वती जी महाराज की पावन उपस्थिति में विश्व प्रसिद्ध सूफी गायक कैलाश खेर, विश्व विख्यात ढोलवादक शिवमणि जी, सभी योगाचार्यों तथा योग प्रतिभागियों ने रंगों का पर्व होली मनाई । सभी योगी होली के रंगों में रेंज नजर आ रहे थे । सभी के चेहरे पर योग महोत्सव के सफलतापूर्वक सम्पन्न होने की ख़ुशी झलक रही थी । होली के भजनों पर सभी मंत्र मुग्धा होकर झूम रहे थे । इस अवसर पर पूज्य स्वामी चिदानंद सरस्वती जी महाराज ने कहा कि ‘न धर्म से, न जाति से केवल योग से हो पहचान’ । उन्होंने सभी को होली की शुभकामनाएं व आशीर्वाद देते हुए कहा, ‘होली प्रसन्नता एवं उल्लास का पर्व है । विश्व की विभिन्न संस्कृतियों के मिलान का पर्व है । ‘

दोपहर के पश्चात अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव के समापन अवसर पर योगगुरु पूज्य बाबा रामदेव, पूज्य स्वामी अवधेशानंद गिरी जी महाराज, पूज्य प्रेम बाबा, आयुष मंत्री भारत सरकार श्रीपाद नाइक, आयुष सचिव भारत सरकार, श्री अजित सरन, प्रमुख सचिव उत्तराखंड सरकार श्री रामास्वामी, उत्तराखण्ड सरकार के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्रालय के सचिव श्री शैलेश बगोली एवं विवेकानंद योग अनुसन्धान संसथान के वाइस चांसलर श्री एच आर नागेन्द्र ने किया सहभाग ।

उत्तराखंड सरकार के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्रालय के सचिव श्री शैलेश बगोली जी ने ‘अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव में दुनिया के कोने-कोने से पधारे अतिथि, सभी प्रतिभागियों एवं योगाचार्यों का उत्तराखंड की धरती पर पधारने के लिए धन्यवाद देते हुए कहा कि यह सब पूज्य स्वामी चिदानंद सरस्वती जी महाराज के आशीर्वाद से सम्पन्न हो पाया । उन्होंने कहा कि उत्तराखंड धरती पर स्वर्ग के सामान है; उत्तराखंड योग का जन्मदाता है । योग प्रकृति के बहुत करीब है अतः योग और प्रकृति का संरक्षण और इसे शिखर तक लें जाना आप सभी का कर्त्तव्य है ।

अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव की निदेशिका सदवही भगवती सरस्वती जी ने इस दिव्या क्षेत्र में पधारे सभी प्रतिभागियों, योगाचार्यों, अतिथियों को भाव भरा धन्यवाद देते हुए कहा कि विदाई के क्षण बहुत की मार्मिक होते है । आप सभी ने हिमालय की गोद में बसे इस दिव्या क्षेत्र में योग की साधना को सम्पन्न किया अब आगे इस यात्रा को जारी रखना । यहाँ से जो भी सीखा उसे कई गुणा कर समाज में बांटना । यहाँ के प्रत्येक कण में दिव्यता का समावेश है; शांति है उसे आप अपने ह्रदय में संजो कर रखना । उन्होंने सभी के सुखद भविष्य की कामना की ।’

होली मिलान के पश्चात प्रतिभागियों ने शिवत्व का प्रतीक रुद्राक्ष के पौधों का रोपण किया । पूज्य साध्वी जी ने श्री कैलाश खेर को शिवत्व का प्रतीक रुद्राक्ष का पौधा भेंट कर आशीर्वाद प्रदान किया तथा उन्हें विदाई दी ।

भोजन के पश्चात की योग कक्षाओं में कैलिफ़ोर्निया से आये कीर्तनियों द्वारा कीर्तन शाला का आयोजन किया गया । अमेरिका की योगाचार्य एरिक कॉफमैन द्वारा ‘आशीर्वाद का आशय’ विषय पर वक्तव्य दिया गया तो माँ ज्ञान सवेरा द्वारा रेकी की कक्षा सम्पन्न की गई ।

बैंगलोर के विवेकानंद योग अनुसन्धान संसथान के वाइस चांसलर श्री एच आर नागेन्द्र ने योग समग्र उपागम के रूप में विषय पर अपने विचार व्यक्त किए । शाम तीन बजे पूज्य प्रेम बाबा जी द्वारा सत्संग की कक्षा संपादित की गयी ।

आज की दिव्या गंगा आरती में पूज्य संतों का दिव्या दर्शन प्राप्त हुआ । पूज्य स्वामी जी ने सभी संतों को रुद्राक्ष का पौधा भेंट किया साथ ही विश्व में जल की उपलब्धता होती रहे इस भावना से वाटर ब्लेसिंग सेरेमनी सम्पन की ।

आरती के पश्चात विश्व प्रसिद्ध आर्केस्ट्रा एवं ढोलवादक शिवमणि के ढोल की थाप पर सभी योग साधक, स्थानीय लोग एवं विश्व के कोने-कोने से आये अतिथि मंत्रमुग्ध होकर थिरकते नजर आ रहे थे |

– जूल्स फेबर ‘अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव में सत्संग का स्वरूप अद्भुत होता है । यहाँ पर प्रगतिशील बदलाव को प्रोत्साहित करने की आकांक्षा हर वक्त विद्यमान रहती है । जहाँ पर 101 देशों की सहभागिता है वहां पर बदलने का अवसर काल्पनिक नहीं यथार्थ है ।’

चीन से आये कृष्णमूर्ति मोहनराज ‘यहाँ आना स्वर्ग में आने के सामान है । सात दिनों तक में अपने आप को भूलकर उच्चकोटि की विभूतियों से मिलने के प्रत्येक क्षण का लाभ उठाता रहा । परमार्थ निकेतन मेरी मातृभूमि है ।

प्रतिभागी चिली की कैरोलिना ने कहा, ‘आत्मा के साथ संयोग से मेरे अंदर निहित प्रेम की भावना में प्रगाढ़ता आ गयी हैं । अपने स्वयं की वास्तविक पहचान के लिए हमें योग महोत्सव से सांच प्राप्त हुआ है । मैं योग महोत्सव को धन्यवाद देती हूँ ।

सूरीनाम से आयी रसीना ने कहा, ‘सूरीनाम का प्रतिनिधित्व करके मैं बेहद खुश हूँ । यहाँ पर आना किसी वरदान से कम नहीं है । गंगा के तट पर होना सपने के साकार होने के सामान है ।’

परमार्थ निकेतन के सेवक सैम ने कहा, ‘देश-विदेश से आये सेवकों के समर्पित भाव के कारण योग महोत्सव की सफलता में चार चाँद लग गएँ । यह कार्यक्रम अपने आप में सहचर्य, जागरूकता एवं सामान लक्ष्य के लिए समर्पण रूपी योग का पर्व हैं ।

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